Friday, 25 September 2015

"NASHA MUKTI DIWAS"


TYP Delhi invites you to Attend "NASHA MUKTI DIWAS" on 27 Sep (sunday) at Oswal Bhawan, Vivek vihar. from 9.oo am. Saniddhya Mantri muni pravar.

Friday, 18 September 2015

"KHAMAT KHAMNA"

Sabhi sathiyon se "SAMVATSARI" ke pavan avsar par Vigat varsh me hui Bhoolo  ke liye "KHAMAT KHAMNA" TYP DELHI

Wednesday, 16 September 2015

"ADHYATM Ki HOUSIE"

All are rqstd. to be part of "ADHYATM Ki HOUSIE" Sanidhya Sadhvishree Ravprabha ji on 16/9/15 at 8.00 pm. At Terapanth Bhwn Rohini. TYP Delhi

"ADHYATM Ki HOUSIE"

All are rqstd. to be part of "ADHYATM Ki HOUSIE" Sanidhya Sadhvishree Ravprabha ji on 16/9/15 at 8.00 pm. At Terapanth Bhwn Rohini. TYP Delhi

Monday, 14 September 2015

जप दिवस 15 सितम्बर 2015

                              जप दिवस                         

                   15 सितम्बर 2015.              

* एक शब्द की आवृत्ति करना, उसे बार-बार दोहराना जप कहलाता है। * जप का अर्थ है - मन्त्र की पुनरावृति।
* वैदिक परम्परा को देखें, जैन या बौद्ध परम्परा को देखें, सबने मन्त्रों का चुनाव किया है।
* जप का प्रयोजन है - विघ्न निवारण। जीवन में बहुत सारी बाधाएं आती है रहती है। मनुष्य अपनी शक्ति के अनुसार उनका निराकरण करता है। कुछ ऐसी बाधाएं भी आती है, जहा मानवीय शक्ति काम नहीं करती वहा वह मंत्रशक्ति का प्रयोग करता है।
* जप का प्रयोजन है - आत्माराधना। आत्मा की आराधना के लिए मन्त्र का प्रयोग किया जाता है। मन्त्र उच्चारण से जो प्रकम्पन होते है वह हमारे जीवन पर, कर्म शरीर पर प्रभाव डालते है।

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Quiz Competition" on "Sadhu Charya" 15/9/15 at 8.00 pm


All are rqstd. to watch "Quiz Competition" on "Sadhu Charya" Sanidhya Shashan sri Muni sri Sumer mal ji (Sudarshan) - Shashan sri Muni sri Kishan Lal ji on 15/9/15 at 8.00 pm. At Adhyatm Sadhna Kendra Mehrauli.

Sunday, 13 September 2015

अणुव्रत चेतना दिवस 14 सितम्बर 2015

              अणुव्रत चेतना दिवस

अणुव्रत दिवस
अणु अर्थात छोटे, व्रत अर्थात नियम।
छोटे-छोटे नियमों को अणुव्रत कहते है।
       श्रावक की पहली भूमिका है - सम्यक्त्व दीक्षा। उसके पश्चात व्रत दीक्षा स्वीकार की जाती है।
व्रत-दीक्षा का अर्थ है असंयम से संयम की ओर प्रस्थान। एक गृहस्थ श्रावक पूरी तरह से संयमी नही हो सकता है। इसी दृष्टि से भगवान महावीर ने उसके लिए बारह व्रत रूप संयम धर्म का निरुपण किया।
        इन्ही व्रतों को सर्वग्राही बनाने के लिए आचार्य श्री तुलसी ने असाम्प्रदायिक धर्म के तौर पर अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया।

ADHYATMIK CRICKET PREMIER LEAGUE


All r rqstd. to watch "ADHYATMIK CRICKET PREMIER LEAGUE" Sanidhya Shashan shree sadhvi Sanghmitra ji on 14/9/15 at 7.30 pm. At Khiloni Devi Dharamsala pitampura

Saturday, 12 September 2015

🙏 वाणी संयमदिवस🙏 13 सितम्बर.2015

🙏  वाणी संयमदिवस🙏

13 सितम्बर.2015

वाणी संयम ->
                   विचारों और भावों को अभिव्यक्त करने का साधन है-वाणी। मौन का सामान्य अर्थ है-न बोलना। बोलना एक बात है और कलापूर्ण बोलना दूसरी बात है।
मौन करे तो ऐसे करें, जिसमें मन और वचन का संयम हो। मौन के समय शांत रहे और यह संकल्प करे -भविष्य में कटु वचन नहीं बोलुंगा।
अतः जो भी बोलें हितकर बोलें। कैसे बोलना है? कब बोलना है ? इसका विवेक रखना आवश्यक है। क्योंकि शिष्ट समाज की पहचान का बहुत बड़ा साधन है- वाणी का विवेक।

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सामायिक दिवस

🙏सामायिक दिवस🙏

12.सितम्बर.2015

सामायिक ->
सम+ आय से सामायिक शब्द बना है। सम यानि समता और आय यानि सम्यक ज्ञान। अर्थात समभाव के द्वारा सम्यक ज्ञान ही सामायिक है।
गणधर गौतम ने भगवान महावीर से पूछा- भंते ! सामायिक का अर्थ क्या है? भगवान ने कहा।- गौतम ! आत्मा का समाधि योग में रहना ही सामायिक है।
जैन श्रावक का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है- सामायिक।
जो लोग दीर्घ साधना नही कर सकते उनके लिये नित्य न्यूनतम 48 मिनिट की साधना सामयिक कहलाती है।
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Thursday, 10 September 2015

स्वाध्याय दिवस 11.सितम्बर.2015

🙏स्वाध्याय दिवस🙏

11.सितम्बर.2015

स्वाध्याय ->  स्व+अध्ययन इन 2 शब्दों से स्वाध्याय बना है, जिसका अर्थ है स्वयं का अध्ययन करना।
भगवान महावीर ने 12प्रकार के तप बताये है उनमें एक है- स्वाध्याय।
स्वाध्याय एक ऐसा प्रयोग है जिसकी प्रतिदिन आराधना करने से नवीन किरण का उदय होता है। विरक्ति का भाव जागता है।
स्वाध्याय से उत्पन्न 'तेज' लाइट हाउस जैसा होता है। वह प्रकाश भला-बुरा सब बता देता है, दिखा देता है।
स्वाध्याय का प्रारम्भ -> 'मैं कौन हूं' इस वाक्य के साथ शुरू होता है असली स्वाध्याय। जो पाठ, प्रकरण और पुस्तक - यह बार-बार स्मरण कराये, "मैं वही शुद्धात्मा हूं"। वही सही स्वाध्याय साधना है।