🙏स्वाध्याय दिवस🙏
11.सितम्बर.2015
स्वाध्याय -> स्व+अध्ययन इन 2 शब्दों से स्वाध्याय बना है, जिसका अर्थ है स्वयं का अध्ययन करना।
भगवान महावीर ने 12प्रकार के तप बताये है उनमें एक है- स्वाध्याय।
स्वाध्याय एक ऐसा प्रयोग है जिसकी प्रतिदिन आराधना करने से नवीन किरण का उदय होता है। विरक्ति का भाव जागता है।
स्वाध्याय से उत्पन्न 'तेज' लाइट हाउस जैसा होता है। वह प्रकाश भला-बुरा सब बता देता है, दिखा देता है।
स्वाध्याय का प्रारम्भ -> 'मैं कौन हूं' इस वाक्य के साथ शुरू होता है असली स्वाध्याय। जो पाठ, प्रकरण और पुस्तक - यह बार-बार स्मरण कराये, "मैं वही शुद्धात्मा हूं"। वही सही स्वाध्याय साधना है।
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